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  • Ajeeb

    सुमेधा एक झटके से उठ कर बैठ गयी…और घबराते हुए इधर उधर देखने लगी….वो भयानक साया और उसकी लाल आंखे अब भी उसके जेहन में घूम रही थी….उसने अपना सर पकड़ लिया जो बहुत दर्द कर रहा था एक तो टूटी हड्डी का दर्द ऊपर से अब सर भी बहुत दर्द हो रहा था….शायद सुबह हो चुकी थी…थोड़ी बहुत रोशनी उस अंधेरी कोठरी में भी आ रही थी….सुमेधा ने अपने टूटे हुए पैर को देखा…टूटी हुई हड्डी साफ नजर आ रही थी….और सूजन भी काफी बढ़ चुकी थी..ये वो अच्छी तरह से जानती थी कि अगर समय पर इसका इलाज न किया गया तो इन्फेक्शन बढ़ने की वजह से उसका पैर सड़ने लगेगा और काटना भी पड़ सकता है….यहाँ तो जिंदगी के लाले पड़े हैं और उसे पैर की चिंता हो रही है….उसे अपने ही विचार पर गुस्सा आने लगा! उसे प्यास भी लग रही थी और भूख भी…

    220.00
  • Ajeeb 2 Dead End

    263.00
  • Ajeeb 3 Last Destination

    245.00
  • Dar : Koi to hai Ch 2

    ‘डर-कोई तो है-चैप्टर-1’ में शुरू हुआ ये खौफनाक सफर सन 1998 से शुरू होता है-जो धीरे-धीरे 2005-06 तक पहुंच जाता है और फिर सफर शुरू होता है श्रापित नगर-सम्पूर्ण नगर के इतिहास का जहां कुछ सवालों के जवाब मिलते हैं तो वहीं कई सवाल उठ खड़े होते हैं। उसी सफर की तारम्यता को निर्बाध रूप से चालू रखते हुए’डर-कोई तो है-चैप्टर-2’का निर्माण किया गया है,जिसमे उस इतिहास के बाद एक और इतिहास से रूबरू होने का मौका मिलता है। जंग-ए-आजादी के अतीत से शुरू हुआ ये सफर पुनः वर्तमान में आता है और वो सभी ‘राज़’ हमारे सामने खुल जाते हैं-जिनके लिए हमने ये डरावना और रोमांचकारी सफर शुरू किया था। उम्मीद ही नही वरन पूरा विश्वास है कि आपका ये सफर फिर से अत्यंत रोमांच से भरपूर और डरावना होने वाला है।

    260.00
  • Darr – Chapter 1 Koi to hai

    बाकी शब्द उसके हलक में अटक गए मानो उसके गले मे सूखी रेत भर गई हो आंखे बाहर को उबलने लगी दिल और दिमाग सुन्न पड़ गए थे !नजारा ही कुछ ऐसा था क्योंकि मनोहर का चेहरा ही नही था ,चेहरा बिल्कुल सपाट था न आंखे ,न नाक, न होंठ बस बिल्कुल सपाट ! किशनपाल मानो लकवे का शिकार हो गया था वो आंखे फाड़ फाड़ कर केवल उस चहरे को ही देख रहा था ऐसा लग रहा था कि उसके शरीर ने काम करना बंद कर दिया था !दिमाग अंदर ही अंदर भागने की चेतावनी दे रहा था लेकिन मानो उसके पैर जमीन से चिपक गए हो ! तभी उसके अंदर मानो चेतना का संचार हुआ और वो लम्बी चीख मारते हुए भागने को हुआ लेकिन उस बिना चेहरे वाले इंसान ने उसके हाँथ पकड़ लिए और घरघराती और रीढ़ में सिहरन पैदा करने वाली भयानक और बर्फ जैसी ठंडी आवाज में बोला “मैं मनोहर नही हूँ” ये सुनते ही किशनपाल हाथ छुड़ा कर भागने लगा और भागते भागते ठोकर खाकर गिरा ! फिर उठ कर भागने को हुआ तो क्या देखता है वो तो उसी बाग के किनारे खड़ा है ये देख कर उसे गश आने लगी और वो बेहोश होकर गिर गया !

    260.00